Wednesday, June 9, 2010

ऐ वक़्त ! तू जरा तो ठहर .....



ऐ वक़्त! जरा तो ठहर
मुझे मेरे यार से तो मिल आने दे..
इतनी भी क्या बैचैनी हैं
दो वादें तो निभाने दे..
मेरे मन की जो मायूसी हैं
इन्हें आँखों से बह जाने दे..
ऐ वक़्त!जरा तो ठहर
मुझे खुद को उसके बिन जीना तो सिखाने दे..

कैसे यह मेरा नाजुक दिल !
आँखों को रोना और होठों को मुस्कुराने दे..
उसके हर एक पल के साथ को
यह कैसे यादों में बह जाने दे..
डर लगता हैं कही खुद को खो न दूँ
मुझे कमसकम उस डर को तो मिटाने दे..
ऐ वक़्त!तू थोडा तो ठहर
मुझे मेरे प्यार को तो भुलाने दे...

कैसी दुनिया हैं यह !
कहती हैं सब बदल जायेगा
बस तू वक़्त को बदल जाने दे..
ऐ वक़्त! तू इनकी न सुन
बस एक बार तो उसकी तस्वीर
इन आँखों में बस जाने दे..
ऐ वक़्त ! तू जरा तो ठहर
बस एक आखरी बार तो मुझे मेरे प्यार को जताने दे..

Tuesday, February 9, 2010

शुरुआत

आज आखिर वो बात हो ही गई,
नज़रों ही नज़रों में मुलाकात हो ही गई|
कुछ वो शरमाए,कुछ हम घबराए|
"मैं","आप"में दो बात हो ही गई||

सपने महके,बादल गरजे|
और न जाने कैसे बरसात हो ही गई||
बातों-बातों में जाने कब रात हो गई|
और यूँ उस नए रिश्तों की शुरुआत हो ही गई||

अपने-अपने रास्तें जाने का वक़्त आया,
तो दिल की बैचेनी से मुलाकात हो ही गई|
नज़रें मिली,मुस्कान छुटी तो,
बस कल फिर मिलने की बात हो ही गई .... ||

Monday, February 8, 2010

इज़हार

वक़्त किसी के आने का इंतज़ार नहीं करता

सूरज कभी रात का दीदार नहीं करता|

होंसला हो तो आगे बढ़ निकलो !!!

क्यूंकि, रोता हैं वो जो इज़हार नहीं करता||



कमजोर हो जिगर तो, इतिहास नहीं गढ़ता|

झूठी हो बुनियाद तो ,विश्वास नहीं बढता ||

डूबते सूरज को तो, कोई भी,नमस्कार नहीं करता|

जज्बा हो तो कर डालो!!!

क्यूंकि, वक़्त किसी के आने का इंतज़ार नहीं करता||



बेकार लकड़ियों से नाविक,नौका तैयार नहीं करता|

वीर तो वो हैं, जो पीछे से वार नहीं करता||

आशिक होता तो,मुमताज की मौत का इंतज़ार नही करता|

चाह हैं तो कह डालो !!!

क्यूंकि,फिर कोई न कह सके की मैं उससे "प्यार" नहीं करता||



वक़्त किसी के आने का इंतज़ार नहीं करता, इंतज़ार नहीं करता

Sunday, February 7, 2010

मंथन

कभी कभी इन खामोश नजरो से अपनी कमजोरियों की और देखता हूँ

तो एहसास होता हैं की यह ही तो मेरी अपनी ही हैं क्यूकि इन्हें मैंने

ही तो इतना आगे बढने दिया हैं , मैंने अगर कभी पहले इन पर ध्यान

दे दिया होता तो शायद आज यह वो न होती जो यह आज हैं

फिर क्यों मैं इन को देख कर दुखी होता हूँ ? क्या कोई माँ -बाप अपने बच्चों से

नाराज़ होते हैं ??? नहीं !!! तो फिर क्यों मैं इनसे मुहँ छुपता फिरता हूँ

क्यों मैं अपने सच को मान कर इन्हें सही नहीं करता हूँ

क्यों आज भी मैं किसी और का इंतज़ार करता हूँ अपने आप को बदलने के लिए

क्यों आज भी मैं अकेले मैं आईने के सामने अपने प्रतिबिम्ब को देख कर आंसू बहाता हूँ

यह जो मेरी दुनिया हैं यह मेरी ही बनाही हुई हैं

तो क्यों मैं इसको नहीं बदल सकता हूँ?

क्यों मैं इतना कमजोर हो गया हूँ?

की जिसे मैंने बनाया वो आज मेरे ऊपर ही हावी हो रही हैं

क्या मुझे खुद को बदलना होगा ??

क्या जिस तरह से मैंने इन कमजोरियों को पाला हैं

उसी तरह से मुझे अब अपनी ताकत को भी बढाना होगा ??
शायद हाँ !!! क्यूकि यह मेरी जिंदगी हैं

और कोई भी इसे अपने तरह से नहीं चला सकता

मेरे सिवा !!!

Sunday, January 31, 2010

दिल


तू ही बता,ऐ दिल मेरे,
मैंने तो हमेशा तेरा ही कहाँ माना हैं |

मेरे इस दीवानेपन को क्या समझूँ ?
लगता हैं मैंने इश्क को कहाँ जाना हैं??

हजारों सपने बोये मैंने,
पर शायद फूलों को तो,
सिर्फ काँटों को साथ निभाना हैं|

जहाँ गीतों की महफ़िल सजनी थी,
वहां सिर्फ सन्नाटो का ठिकाना हैं||

यह कैसा इन्साफ हैं?
इश्क की तपिश में जलता सिर्फ परवाना हैं|

कोई इसे पागल समझे,
या कोई कहे दीवाना हैं||

ऐ दिल अब तू ही बता!!
सिर्फ तुने ही इस मासूम से इश्क को
अछे से जाना हैं ,जाना हैं ||

Friday, January 22, 2010

यादें

सपने संजोया करती हैं जो आँखें,
उनमे बीतें पलों की सिर्फ तस्वीर रह जाती हैं |
रूठा हो खुदा,तो बड़ी से बड़ी उम्मीद ढह जाती हैं||
जज्बा-ऐ-इश्क न हो,तो सिर्फ बातें कहीं जाती हैं|
वक़्त गुजर जाने के बाद तो सिर्फ यादें रह जाती हैं||

इस कमजोर दिल को समझाने के लिए,
जिंदगी झूठी तस्सलियाँ दिलाती हैं|
ये ख्वाहिशें ही तो हैं,जो धीमे धीमे से
जिंदगी रंगीन बनती हैं||
पर किसी न किसी मोड़ पर,हकीक़त हम पर मुस्कुराती हैं |
वक़्त गुजर जाने के बाद तो सिर्फ यादें रह जाती हैं...

Wednesday, January 20, 2010

ख़्वाब

कल रात दिल के दरवाजे पर एक दस्तक हुई ,
दिल घबराया की इतनी रात कौन आया हैं??
कंपकपाते मन के साथ दरवाजा खोला,
देखा तो एक खूबसूरत ख्वाब आया था||
मेरे खोये हुए इश्क को अपने साथ लाया था,
वो आँखें जिन्होंने हमें जीना सिखाया था|
वो "लब" जिन्होंने इन आँसुओं को जज्बात बताया था ,
जिसने,मेरी खुशियों को अपनी मुस्कान बनाया था ||
वो ख़्वाब,खुद चलकर,मेरे पास आया था|
तभी किसी आवाज़ से नींद टूटी,
देखा तो,कमरे में कोई न था||
ख़्वाब था शायद,खूबसूरत ख़्वाब लाया था!!!

Friday, December 18, 2009

A short story

“Started with year’s longest day, Fear of getting rejected, Assaulted, betrayed by a closed one,

little Confused, Angry, Lot of emotions & tears, mental breakdown, got one of the best projects,

University Results, Swine flu break, CAT dilemma, AES president, magazine launch, IAS

Preparation, Coach’s health, diwali break, upset, missing home, Project Oral, best buddies

placed in Persistent, met her after a long time, Happy, Theory exams, Missed CAT exam,

Magazine got first Prize, placement Session, nervous, Coordinator, 12 December placement

starts, gets in touch with lot Of new friends, 17 December Infosys, Accenture, Cognizant & TCS

calling.Finally going with Accenture, Mixed Reactions.21 December, year’s smallest day, with

lots of Up’s & Down’s in my life.

Finally, I am going back to Pavilion after Exact six months”.

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