
पिछली कड़ी को आगे बदते हुए मेरी शुरुवाती दिनों (8वी कक्षा) के दौरान लिखी गई कुछ कवितायें लेकर आपके सामने प्रस्तुत हूँ...यह कविता आज के नेताओ पर आधारित हैं ...इसमे मैंने उनपर कटाक्ष करने की कोशिश की हैं ...प्रस्तुत हैं मेरी छोटी से पेशकश .....
शहीदों की भूमि हैं भारत,
भ्रष्टाचारी नेता हैं आज का नारद |
यह संविधान व जनता के बीच की कड़ी हैं,
जिसके कारण भारतीय जनता आपस में लड़ी हैं||
यह देश की समृद्धि में अवरोधक रूपी दिवार खड़ी हैं ,
इसके कारण भारतीय अर्थव्यवस्था सड़ी हैं|
बड़ी महँ संस्कृति हमारी,
आज लुप्त हो गई सारी||
कुर्सियों के लिए पार्टियों का हो गया फैलावा,
नेताओ को करना पड़ता हैं आज बड़ा दिखावा|
इन नेताओ के कारण फैली यह महामारी,
चुनाओ के समय जनता के सामने बन जाते भिखारी,
फिर पाँच साल तक जनता को भूल जाता यह सेवक भ्रष्टाचारी||
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