Friday, January 22, 2010

यादें

सपने संजोया करती हैं जो आँखें,
उनमे बीतें पलों की सिर्फ तस्वीर रह जाती हैं |
रूठा हो खुदा,तो बड़ी से बड़ी उम्मीद ढह जाती हैं||
जज्बा-ऐ-इश्क न हो,तो सिर्फ बातें कहीं जाती हैं|
वक़्त गुजर जाने के बाद तो सिर्फ यादें रह जाती हैं||

इस कमजोर दिल को समझाने के लिए,
जिंदगी झूठी तस्सलियाँ दिलाती हैं|
ये ख्वाहिशें ही तो हैं,जो धीमे धीमे से
जिंदगी रंगीन बनती हैं||
पर किसी न किसी मोड़ पर,हकीक़त हम पर मुस्कुराती हैं |
वक़्त गुजर जाने के बाद तो सिर्फ यादें रह जाती हैं...

3 comments:

Udan Tashtari said...

इस कमजोर दिल को समझाने के लिए,
जिंदगी झूठी तस्सलियाँ दिलाती हैं|
ये ख्वाहिशें ही तो हैं,जो धीमे धीमे से
जिंदगी रंगीन बनती हैं||

बहुत बढ़िया...

dhiraj said...

bahut badhiya,, aamin

चेतना के स्वर said...

gajjab bhai lage raho

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