Thursday, July 23, 2009

चाहत


वक्त-बेवक्त याद आया न करो,
ख़ुद याद न करो,तो सताया न करो |
मेरी बेचैनियों का अगर तुझे अहसास नही ,
तो मेरी रातों की नींदे चुराया न करो||

तुझे नही है अगर मेरी चाहत पर भरोसा,
तो नजरो से तीर चलाया न करो|
मुझे रहने दो खुश!!मेरे ख्वाबो के महलो मे,
इन्हे ताश के पत्तो की तरह गिराया न करो||

जब देना ही हैं मेरे दिल को जख्म,
तो जाते जाते मुस्कुराया न करो|
अगर न कहना हैं तो एक बार में कह दो,
इस पागल के इश्क को बढाया न करो||

वक्त-बेवक्त याद आया करो...

अगर प्यार नही मुझसे,तो न सही|
पर बार-बार सामने आकर,धड़कने बढाया न करो|
जब तोड़ना ही हैं तुझे इस दिल को,
तो इस मासूम को जीना सिखाया न करो||

जाओ कही दूर जाओ मुझसे|
जब ख़ुद याद करो,तो सताया करो |
मुझे वक्त-बेवक्त याद आया करो.....

2 comments:

Chandradhar Prasad said...

aamir i cudnt gt everythng bt wahtevr i realised that is absolutely true..!!

Raunaq Kothari said...

bhaiiiiiii 'm makin a community 4 u.... i'm fan of urs.... kya likhi hai yaar... awesume.... maza agaya... dil ke taar hila diye bhai.. sahi mein kisi tadapte aashiq k dil ka haal bayan kar diya .. in short unki halat ko juban de di woh bhi itni mast... bhai u r genius... luv it.. keep it up....

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